चेतावनी — साधना में जल्दबाजी न करें
यदि आप मुझसे कुछ सीखना चाहते हैं, तो परिश्रम तो करना ही होगा।
किसी को दो दिन में तारा सिद्ध करनी है, किसी को नौ दिन में छिन्नमस्ता, किसी को पाँच दिन में मातंगी सिद्ध करनी है, तो किसी को ग्यारह दिन में भुवनेश्वरी।
कितनी बचकानी बात है!
प्रत्येक साधना की अपनी एक विशेष प्रक्रिया होती है, जिससे होकर प्रत्येक साधक को गुजरना ही पड़ता है। साधना कोई ऐसा कार्य नहीं है जिसे जल्दबाजी में कुछ दिनों में पूरा कर लिया जाए।
और जब बात महाविद्या साधना की हो, तो यह कार्य और भी कठिन हो जाता है। इसमें साधक को और अधिक परिश्रम, अनुशासन, धैर्य और साधना-प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है।
कई-कई मंत्रों को क्रमशः साधना पड़ता है, अनेक अनुष्ठान करने पड़ते हैं और साधना की प्रत्येक अवस्था को विधि-विधान एवं अनुशासन के साथ पूरा करना पड़ता है।
जब हम आपको यही प्रक्रिया बताते हैं, तो आपको लगता है कि हम आपको टाल रहे हैं।
इस बात पर मैं कोई सफाई नहीं दूंगा।
यदि महाविद्या-साधना की ओर आगे बढ़ना है, तो पहले परिश्रम करना सीखिए। साधना में धैर्य रखिए और उसकी प्रक्रिया का सम्मान कीजिए।
और यदि कोई आपको दो या तीन दिन में सिद्धि कराने का दावा करता है, तो आप उसके पास जा सकते हैं। इससे कम से कम मेरा कार्यभार तो कम होगा और मुझे भी पता चल जाएगा कि तारा दो दिन में और काली ग्यारह दिन में कैसे सिद्ध होती हैं।
मेरा उद्देश्य किसी के हृदय को पीड़ा पहुँचाना नहीं है। यदि मेरी बातों से किसी को दुःख हुआ हो, तो मैं हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थी हूँ।
परंतु कभी-कभी व्यर्थ के रोग को मिटाने के लिए कड़वे वचनों की औषधि आवश्यक हो जाती है।
⚠️ चेतावनी
साधना सिद्ध गुरु की देखरेख में ही सम्पन्न करें।
सिद्ध गुरु से दीक्षा, आज्ञा, सिद्ध यंत्र, सिद्ध माला एवं आवश्यक सिद्ध सामग्री प्राप्त करके ही गुरु के मा
राजयोग पीठ फाउंडेशन ट्रस्ट
तंत्र-मंत्र-यंत्र एवं ज्योतिष विज्ञान अनुसंधान संस्थान
आश्रम का परिचय
महाविद्या आश्रम (राजयोग पीठ फाउंडेशन ट्रस्ट) में मुख्य रूप से तांत्रिक परंपराओं, साधनाओं, मंत्र-यंत्र उपासना तथा ज्योतिष के माध्यम से आध्यात्मिक मार्गदर्शन और मानव कल्याण से जुड़े कार्य किए जाते हैं।
आश्रम का उद्देश्य प्राचीन भारतीय तंत्र, मंत्र, यंत्र एवं ज्योतिष परंपराओं के अध्ययन, साधना, अनुसंधान तथा साधकों को उचित मार्गदर्शन प्रदान करना है।
आश्रम का संचालन एवं मार्गदर्शन महायोगी राजगुरु जी 《अघोरी रामजी》 के निर्देशन में किया जाता है तथा यह कार्य राजयोग पीठ फाउंडेशन ट्रस्ट (रजि.) के अंतर्गत संचालित है।
1. महाविद्या एवं तांत्रिक साधना
साधकों को गुरु-परंपरा एवं निर्धारित साधना-पद्धति के अनुसार दशमहाविद्याओं तथा विभिन्न मंत्र-साधनाओं का मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है। माँ काली, तारा, बगलामुखी, छिन्नमस्ता, मातंगी, भुवनेश्वरी आदि महाविद्याओं से संबंधित साधना-पद्धतियों का अध्ययन एवं अभ्यास परंपरागत अनुशासन के अनुसार कराया जाता है। साधना में जल्दबाजी को उचित नहीं माना जाता, क्योंकि प्रत्येक साधना की विशिष्ट प्रक्रिया होती है, जिससे होकर साधक को अनुशासन और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ना पड़ता है।
2. मंत्र, यंत्र एवं अनुष्ठान
विशिष्ट आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए मंत्र-जप, यंत्र-उपासना, हवन तथा विभिन्न अनुष्ठानों से संबंधित मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
साधना की आवश्यकता एवं परंपरा के अनुसार यंत्र, माला तथा अन्य साधना-सामग्री के विषय में भी मार्गदर्शन दिया जाता है।
विशिष्ट आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए मंत्र-जप, यंत्र-उपासना, हवन तथा विभिन्न अनुष्ठानों से संबंधित मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
साधना की आवश्यकता एवं परंपरा के अनुसार यंत्र, माला तथा अन्य साधना-सामग्री के विषय में भी मार्गदर्शन दिया जाता है।
3. ज्योतिष एवं कुंडली अध्ययन
जन्मकुंडली, ग्रह-स्थिति तथा ज्योतिषीय परंपराओं के आधार पर जीवन से संबंधित विभिन्न विषयों पर परामर्श एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
ग्रह-दोष, राहु-केतु संबंधी समस्याएँ, पितृ दोष, कालसर्प आदि विषयों पर परंपरागत ज्योतिषीय दृष्टिकोण से अध्ययन एवं उपाय बताए जाते हैं।
4. आध्यात्मिक मार्गदर्शन एवं ध्यान
साधकों को साधना, ध्यान, मंत्र-जप, अनुशासन तथा आध्यात्मिक जीवन-पद्धति के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
दूर से आने वाले साधकों के लिए साधना एवं ध्यान के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने का भी प्रयास किया जाता है।
आश्रम का मुख्य उद्देश्य
📜प्राचीन परंपराओं का अध्ययन एवं संरक्षण
प्राचीन भारतीय तंत्र, मंत्र, यंत्र और ज्योतिष परंपराओं का अध्ययन एवं अनुसंधान करना तथा उनके विषय में व्यवस्थित जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना।
🧘 आध्यात्मिक उत्थान
साधकों को अनुशासन, साधना, ध्यान और आत्मचिंतन के माध्यम से आध्यात्मिक विकास की दिशा में मार्गदर्शन देना।
🤝 मानव कल्याण
जीवन की विभिन्न समस्याओं से परेशान लोगों को उनकी परिस्थितियों के अनुसार आध्यात्मिक एवं ज्योतिषीय परामर्श उपलब्ध कराना तथा परंपरागत साधना-पद्धतियों के माध्यम से मार्गदर्शन प्रदान करना।
⚠️ विशेष चेतावनी — साधना में जल्दबाजी न करें
यदि आप मुझसे कुछ सीखना चाहते हैं, तो परिश्रम अनिवार्य है।
किसी को दो दिन में तारा सिद्ध करनी है, किसी को नौ दिन में छिन्नमस्ता, किसी को पाँच दिन में मातंगी सिद्ध करनी है, तो किसी को ग्यारह दिन में भुवनेश्वरी—
यह अत्यंत अव्यावहारिक एवं अपरिपक्व दृष्टिकोण है।
प्रत्येक साधना की अपनी एक विशिष्ट प्रक्रिया होती है, जिससे होकर प्रत्येक साधक को अनिवार्य रूप से गुजरना पड़ता है।
और जब बात महाविद्या साधना की हो, तो यह और भी अधिक गहन एवं कठिन हो जाती है। इसमें साधक को कठोर परिश्रम, अनुशासन, धैर्य तथा साधना-प्रक्रिया का पूर्ण एवं निष्ठापूर्वक पालन करना आवश्यक होता है।
कई-कई मंत्रों का क्रमबद्ध अभ्यास करना पड़ता है, अनेक अनुष्ठान करने होते हैं तथा साधना की प्रत्येक अवस्था को विधि-विधान एवं अनुशासन के साथ पूर्ण करना होता है।
जब हम आपको यही प्रक्रिया बताते हैं, तो आपको प्रतीत होता है कि हम आपको टाल रहे हैं।
इस विषय पर मैं कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण नहीं दूंगा।
यदि आप महाविद्या-साधना की ओर आगे बढ़ना चाहते हैं, तो पहले परिश्रम करना सीखें। साधना में धैर्य रखें और उसकी प्रक्रिया का पूर्ण सम्मान करें।
और यदि कोई आपको दो या तीन दिन में सिद्धि कराने का दावा करता है, तो आप निःसंकोच उसके पास जा सकते हैं। इससे कम से कम मेरा कार्यभार तो कम होगा और मुझे भी यह समझने का अवसर मिलेगा कि तारा दो दिन मे…

